Dare nabi par

 दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते,

हो हम पे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा।

मदीने वाले कहें मुकामी,

हो उनके दर पर कयाम ऐसा।


लबों पे नाम-ए-नबी जब आया,

तो रिज़्क़ पा हाथ आंसुओं को पाया।

जो टाल देता है मुश्किलों को,

मेरे नबी का है नाम ऐसा।


जो गमज़दों को गले लगा ले,

बुरों को दामन में जो छुपा ले।

है दूसरा कौन इस जहाँ में,

सिवाए खैरुल अनाम ऐसा।


मुझी को देखो वो बेतलब ही,

नवाज़ते जा रहे हैं पैहम।

ना कोई मेरा अमल है ऐसा,

ना कोई मेरा है काम ऐसा।


बिलाल तुझ पर निसार जाऊं,

कि खुद नबी ने तुझे ख़रीदा।

नसीब हो तो नसीब ऐसा,

ग़ुलाम हो तो ग़ुलाम ऐसा।


नमाज़-ए-अक़्सा में जब पढ़ाई,

तो अम्बिया और रुसुल ये बोले।

नमाज़ हो तो नमाज़ ऐसी,

इमाम हो तो इमाम ऐसा।


मैं ख़ालिद अपने नबी पे कुर्बान,

है जिनका ख़ुल्क़-ए-अज़ीम क़ुरान।

रोशनी जिसकी दो जहाँ में,

कही है माह-ए-तमाम ऐसा।


दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते,

हो हम पे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा।

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