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Ya Rabbe Mustafa Tu Muje Hajj Pe Bula

 Ya Rabbe Mustafa Tu Muje Hajj Pe Bula Aake Mein Dekh Lun Aankh Se Kaaba Tera Hajj ka Sharaf ho fir ata Ya Rabbe Mustafa Meetha Madina fir dikha Ya Rabbe Mustafa Ya Rabbe Mustafa Tu Muje Hajj Pe Bula Aake Mein Dekh Lun Aankh Se Kaaba Tera Rukh Soo-e-Kaaba Hath mein Zamzam ka Jaam ho Pee kar karun Mein fir Dua Ya Rabbe Mustafa Ya Rabbe Mustafa Tu Muje Hajj Pe Bula Aake Mein Dekh Lun Aankh Se Kaaba Tera Roti rahe jo Har Gadi Ishke Rasool mein Wo Aankh de de Ya Khuda Ya Rabbe Mustafa Ya Rabbe Mustafa Tu Muje Hajj Pe Bula Aake Mein Dekh Lun Aankh Se Kaaba Tera Mere Maula Karam ho Karam Mere Maula Karam ho Karam De de Tawafe Khana-e-Kaaba ka fir Sharaf Farma Ye Pura Mudd’aa Ya Rabbe Mustafa Ya Rabbe Mustafa Tu Muje Hajj pe bula Aake Mein dekh lun Aankh se Kaaba Tera Aankhon mein Jalwa Shah ka Aur Lab pe Naat ho Jab Rooh Tan se ho Juda Ya Rabbe Mustafa Ya Rabbe Mustafa Tu Muje Hajj pe bula Aake Mein dekh lun Aankh se Kaaba Tera Firdos mein Pados de Apne Habib Ka Moula Ali ka Wasta Ya Rab...

हक़ीक़त में वो लुत्फ़-ए-ज़िंदगी पाया नहीं करते

 हक़ीक़त में वो लुत्फ़-ए-ज़िंदगी पाया नहीं करते  जो याद-ए-मुस्तफ़ा से दिल को बहलाया नहीं करते ज़बाँ पर शिकवा-ए-रंज-ओ-अलम लाया नहीं करते  नबी के नाम-लेवा ग़म से घबराया नहीं करते अरे ओ ना-समझ ! कुर्बान हो जा उन के रौज़े पर  ये लम्हे ज़िंदगी में बार बार आया नहीं करते ये दरबार-ए-मुहम्मद है, यहाँ अपनों का क्या कहना  यहाँ से हाथ ख़ाली गैर भी जाया नहीं करते ये दरबार-ए-मुहम्मद है, यहाँ मिलता है बे-माँगे  अरे नादाँ ! यहाँ दामन को फैलाया नहीं करते मुहम्मद मुस्तफ़ा के बाग़ के सब फूल ऐसे हैं  जो बिन पानी के तर रहते हैं, मुरझाया नहीं करते जो उन के दामन-ए-रहमत से वाबस्ता हैं, ऐ हामिद !  किसी के सामने वो हाथ फैलाया नहीं करते

Allah Allah Kya Hai Jalwa Baba Tajuddin Ka

 Allah Allah Kya Hai Jalwa Baba Tajuddin Ka Allah Allah kya hai jalwa Baba Tajuddin ka, Jo bhi dekho, woh hai shaida Baba Tajuddin ka. Kyun na zamana hoga deewana Baba Tajuddin ka, Shah-e-Najaf hain nana-dada Baba Tajuddin ka. Tangdasti uske ghar mein aa nahin sakti kabhi, Mil gaya hai jisko sadqa Baba Tajuddin ka. Unse rehti hain balaayein khud hamesha door-door, Hai saron par jinke saaya Baba Tajuddin ka. Nani-dadi yaad aati hai ooncha udne walon ko, Jab padta hai peeth par koda Baba Tajuddin ka. Mil jaati thi ranj-o-alam se rahat sunne walon ko, "Hoji Bawa" wala jumla Baba Tajuddin ka. Tu bata ya na bata, sabko hai Amjad yeh khabar, Tu hai aashiq bhola-bhala Baba Tajuddin ka.

Dare nabi par

 दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हम पे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा। मदीने वाले कहें मुकामी, हो उनके दर पर कयाम ऐसा। लबों पे नाम-ए-नबी जब आया, तो रिज़्क़ पा हाथ आंसुओं को पाया। जो टाल देता है मुश्किलों को, मेरे नबी का है नाम ऐसा। जो गमज़दों को गले लगा ले, बुरों को दामन में जो छुपा ले। है दूसरा कौन इस जहाँ में, सिवाए खैरुल अनाम ऐसा। मुझी को देखो वो बेतलब ही, नवाज़ते जा रहे हैं पैहम। ना कोई मेरा अमल है ऐसा, ना कोई मेरा है काम ऐसा। बिलाल तुझ पर निसार जाऊं, कि खुद नबी ने तुझे ख़रीदा। नसीब हो तो नसीब ऐसा, ग़ुलाम हो तो ग़ुलाम ऐसा। नमाज़-ए-अक़्सा में जब पढ़ाई, तो अम्बिया और रुसुल ये बोले। नमाज़ हो तो नमाज़ ऐसी, इमाम हो तो इमाम ऐसा। मैं ख़ालिद अपने नबी पे कुर्बान, है जिनका ख़ुल्क़-ए-अज़ीम क़ुरान। रोशनी जिसकी दो जहाँ में, कही है माह-ए-तमाम ऐसा। दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हम पे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा।

Kijiye nazre karam sarkar tajul auliya

 ​औरौ को जो मिला है, वै मुकद्दर से मिला है मुझको तो मुकद्दर भी या ताज-उल-वरा तेरे दर से मिला है ​ ​कीजिए नज़रे करम सरकार ताज-उल-औलिया आया हूँ बा चश्मे नम सरकार ताज-उल-औलिया आप हैं मुश्किलकुशा फिर मैं किसे आवाज दूँ? कीजिए मुश्किल मेरी आसान ताज-उल-औलिया ​कीजिए नज़रे करम सरकार ताज-उल-औलिया   एक-दो एहसान हो तो मैं करूँ उसका बयाँ आपके हैं सैकड़ों एहसान ताज-उल-औलिया ​ कीजिए नज़रे करम सरकार ताज-उल-औलिया मार दे ठोकर जीले मुर्दा को मैं सदके तेरे जाह अता करती है तेरी लात ताज-उल-औलिया कीजिए नज़रे करम सरकार ताज-उल-औलिया नाज़ कर अपने मुकद्दर पर ऐ शहरे नागपुर तुझमें है जलवा नुमा सरकार ताज-उल-औलिया ​ कीजिए नज़रे करम सरकार ताज-उल-औलिया ​बैठे-बैठे ही करा देते हैं काबे का तवाफ़ जान लो इससे है क्या सरकार ताज-उल-औलिया कीजिए नज़रे करम सरकार ताज-उल-औलिया हर बलाए नागाहानी सर से सरवर टल गई जब कहा मैंने कि या सरकार ताज-उल-औलिया कीजिए नज़रे करम सरकार ताज-उल-औलिया ​आया हूँ बा चश्मे नम सरकार ताज-उल-औलिया ​

करो मुझ पर मेहरबानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !

 करो मुझ पर मेहरबानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी ! तुम्हारी है जहाँ-बानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी ! ​तलाश-ए-हक़-त'आला में हुकूमत तर्क फ़र्मा कर हुए महबूब-ए-यज़्दानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी ! ​हज़ारों ग़म के मारों को मिली राहत तेरे दर से तेरा दरबार ला-सानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी ! ​तवज्जोह की नज़र पड़ जाए तेरी गर, मेरे आक़ा ! करे बिल्ली भी मेहमानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी ! ​नसीबा गर वफ़ा मुझ से करे तो आप के दर की करूँगा मैं भी दरबानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी ! ​मरीज़ों, ग़म के मारों की मुसीबत दूर करता है तेरा मुश्किल-कुशा पानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी ! ​मेरे मुर्शिद मु'ईन अशरफ़ को रखियो तुम हिफ़ाज़त में है तेरा बेटा रूहानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी ! ​शह-ए-ख़्वाजा के सदक़े में ख़ुदा-रा कर भी दीजे हल मुनव्वर की परेशानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !

ऐ ज़हरा के बाबा ! सुनें इल्तिजा (मदीना बुला लीजिए)**

 **ऐ ज़हरा के बाबा ! सुनें इल्तिजा (मदीना बुला लीजिए)** ऐ ज़हरा के बाबा ! सुनें इल्तिजा मदीना बुला लीजिए कहीं मर न जाए गुलाम आप का मदीना बुला लीजिए सताती है मुझ को, रुलाती है मुझ को ये दुनिया बहुत आज़माती है मुझ को हूँ दुनिया की बातों से टूटा हुआ मदीना बुला लीजिए बड़ी बेकसी है, बड़ी बे-क़रारी न कट जाए, आक़ा ! यूँही 'उम्र सारी कहाँ ज़िंदगानी का है कुछ पता मदीना बुला लीजिए ये एहसास है मुझ को, मैं हूँ कमीना हुज़ूर ! आप चाहें तो आऊँ मदीना गुनाहों के दलदल में मैं हूँ फँसा मदीना बुला लीजिए मैं देखूँ वो रौज़ा, मैं देखूँ वो जाली बुला लीजे मुझ को भी, सरकार-ए-'आली ! कहाँ जाए, आक़ा ! ये मँगता भला मदीना बुला लीजिए वो रमज़ान तेरा, वो दालान तेरा वो 'अज्वा, वो ज़मज़म, ये मेहमान तेरा तेरे दर पे इफ़्तार का वो मज़ा मदीना बुला लीजिए जहाँ के सभी ज़र्रे शम्स-ओ-क़मर हैं जहाँ पे अबू-बक्र-ओ-'उस्माँ, 'उमर हैं जहाँ जल्वा-फ़रमा हैं हम्ज़ा चचा मदीना बुला लीजिए न इतना मैं माँ और बाबा को चाहूँ तुम्हें जितना चाहूँ, किसी को न चाहूँ मेरे बाल-बच्चे हों तुम पर फ़िदा मदीना बुला लीजिए हुआ है जहाँ से जह...