करो मुझ पर मेहरबानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !

 करो मुझ पर मेहरबानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !

तुम्हारी है जहाँ-बानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !


​तलाश-ए-हक़-त'आला में हुकूमत तर्क फ़र्मा कर

हुए महबूब-ए-यज़्दानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !


​हज़ारों ग़म के मारों को मिली राहत तेरे दर से

तेरा दरबार ला-सानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !


​तवज्जोह की नज़र पड़ जाए तेरी गर, मेरे आक़ा !

करे बिल्ली भी मेहमानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !


​नसीबा गर वफ़ा मुझ से करे तो आप के दर की

करूँगा मैं भी दरबानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !


​मरीज़ों, ग़म के मारों की मुसीबत दूर करता है

तेरा मुश्किल-कुशा पानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !


​मेरे मुर्शिद मु'ईन अशरफ़ को रखियो तुम हिफ़ाज़त में

है तेरा बेटा रूहानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !


​शह-ए-ख़्वाजा के सदक़े में ख़ुदा-रा कर भी दीजे हल

मुनव्वर की परेशानी, मेरे मख़्दूम सिमनानी !

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